मंत्री ने उठाए सवाल, सीएम शिवकुमार ने बिदादी टाउनशिप योजना का किया बचाव
बंगलूरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना का पुरजोर समर्थन किया है। हालांकि, स्थानीय किसानों और खुद सत्ताधारी दल कांग्रेस के ही कुछ धड़ों की ओर से इस योजना का लगातार विरोध किया जा रहा है। इस बढ़ते असंतोष के बीच सूबे के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि इस संवेदनशील विषय को आगामी 20 जून को होने वाली मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में विचार-विमर्श के लिए रखा जा सकता है।
गौरतलब है कि बिदादी टाउनशिप परियोजना मुख्यमंत्री की 'ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप' योजना का एक बेहद अहम हिस्सा है। इसे देश की पहली 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) आधारित एकीकृत टाउनशिप के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस मेगा प्रोजेक्ट के दायरे में क्षेत्र के नौ गांवों की लगभग 7,481 एकड़ जमीन आएगी, जिसके लिए भारी-भरकम पूंजी निवेश का अनुमान लगाया गया है। इस टाउनशिप को मूर्त रूप देने के लिए बेंगलुरु के बाहरी इलाके बिदादी और उसके आसपास बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण की तैयारी है।
आलोचकों पर लगा राजनीति करने का आरोप
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि यह टाउनशिप उनकी व्यक्तिगत सोच नहीं है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के कार्यकाल के दौरान इसे अधिसूचित किया गया था। उन्होंने बताया कि इसके बाद आई भाजपा सरकार के समय भी केआईएडीबी ने करीब 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। मुख्यमंत्री ने दूसरे प्रदेशों का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी इससे कहीं बड़ी परियोजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं। उन्होंने विपक्ष और आलोचकों पर इस जनहित के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रभावित जमीन मालिक पहले की विकास योजनाओं को अपनी सहमति दे चुके हैं।
कैबिनेट मंत्री ने जताई बड़ी चिंता
दूसरी तरफ, प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री सतीश जारकीहोली ने इस पूरे मामले में फूंक-फूंक कर कदम रखने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले शासन को प्रभावित पक्षों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना होगा। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक भ्रम या विवाद पैदा नहीं होना चाहिए, क्योंकि पार्टी का भविष्य भी इन बड़े फैसलों से जुड़ा होता है। मंत्री ने साफ किया कि टाउनशिप के विकास के चलते सरकार की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव नहीं आना चाहिए। राजनीतिक नुकसान के सवाल पर उन्होंने माना कि प्रशासन जमीनी स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों के प्रति पूरी तरह सतर्क है।
अंतिम निर्णय से पहले होगी व्यापक समीक्षा
जारकीहोली ने स्वीकार किया कि फिलहाल सरकार के पास इस बात के पुख्ता आंकड़े नहीं हैं कि विरोध का पैमाना कितना बड़ा है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यापक चर्चा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी योजना का परिणाम सकारात्मक आना चाहिए, न कि नकारात्मक। पार्टी और सरकार के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना के सभी पहलुओं पर गहन मंथन किया जाएगा ताकि विकास और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाया जा सके।

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