विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए भारत के खिलाफ बोले पाक सेना प्रमुख
रावलपिंडी: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने एक बार फिर अपनी पुरानी रणनीति अपनाते हुए भारत के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है। रावलपिंडी में एक कार्यक्रम के दौरान मुनीर ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी दुस्साहस का 'दर्दनाक जवाब' दिया जाएगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह बयान और कुछ नहीं बल्कि पाकिस्तान की अंदरूनी समस्याओं, जैसे चरमराती अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता से अपनी जनता का ध्यान भटकाने का एक जरिया है।
आतंकवाद पर चुप्पी और कश्मीर का पुराना राग
जनरल मुनीर ने अपने भाषण में भारत पर आतंकवाद फैलाने के बेबुनियाद आरोप तो लगाए, लेकिन पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठनों पर एक शब्द भी नहीं बोला। उन्होंने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उछालने की कोशिश की और यहां तक दावा कर दिया कि पाकिस्तान में हो रही आतंकी घटनाओं के पीछे भारत का हाथ है। मुनीर का यह रुख उनकी हताशा को साफ दर्शाता है, क्योंकि भारत पहले ही कह चुका है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, बातचीत संभव नहीं है।
अपने ही देश में घिरी पाकिस्तानी सेना
हकीकत यह है कि पाकिस्तानी सेना इन दिनों अपने ही घर में उग्रवादी गुटों के सामने बेबस नजर आ रही है। हाल ही में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने सेना को बड़ा नुकसान पहुँचाया है। संगठन का दावा है कि अप्रैल के आखिरी दिनों में हुए हमलों में कम से कम 42 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा में भी एक भीषण बम धमाके में 21 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई। जनरल मुनीर इन हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, जिससे सेना के भीतर ही उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश
पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह चरमरा चुकी है और सेना अपनी गिरती साख बचाने के लिए अब भारत विरोधी बयानबाजी को ढाल बना रही है। पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व असल समस्याओं को हल करने के बजाय 'काल्पनिक दुश्मनों' का डर दिखाकर अपनी सत्ता बचाए रखना चाहता है। हालांकि, अब पाकिस्तान की जनता भी सेना की इस पुरानी चाल को समझने लगी है और वह जुमलों के बजाय असली समाधान चाहती है।

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