फ्लैट खरीदारों के सिर पर मंडराया जोखिम, बीमा व्यवस्था नदारद
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर की बहुमंजिला इमारतों (High-rise Societies) में रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची सोसाइटियों में रहने वाले परिवारों की जीवनभर की कमाई एक 'अदृश्य वित्तीय खतरे' के साये में है। वर्तमान व्यवस्था में सुरक्षा और आर्थिक क्षतिपूर्ति का कोई सामूहिक तंत्र न होना एक बड़ी खामी बनकर उभरा है।
हाईराइज सोसाइटियों में सामूहिक जोखिम: एक की गलती, सबकी सजा
दिल्ली-एनसीआर: महानगरों में आसमान छूती इमारतों में घर लेना कई लोगों का सपना होता है, लेकिन यहाँ सुरक्षा का कानूनी और वित्तीय ढांचा बेहद कमजोर है। भारत में 'मास्टर स्ट्रक्चरल इंश्योरेंस' की अनिवार्यता न होना एक ऐसा बड़ा गैप है, जो किसी भी अनहोनी की स्थिति में सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ला सकता है।
एक ढांचा, साझा जिम्मेदारी
हाईराइज सोसाइटियों की बनावट ऐसी होती है कि वहां किसी भी हादसे को 'निजी लापरवाही' तक सीमित नहीं रखा जा सकता। पूरी इमारत कंक्रीट और स्टील के एक ही ढांचे से जुड़ी होती है। यदि किसी एक मंजिल पर आग लगती है या स्ट्रक्चर में दरार आती है, तो उसका सीधा असर पूरी बिल्डिंग की मजबूती पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आग भले ही एक किचन में लगे, लेकिन उसका धुआं ऊपर की मंजिलों को और दमकल का पानी नीचे के घरों को तबाह कर देता है।
कानूनी पेच और मुआवजे की चुनौती
सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए तो 'थर्ड पार्टी इंश्योरेंस' अनिवार्य है, लेकिन करोड़ों की कीमत वाले फ्लैट्स के लिए ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है।
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जटिल प्रक्रिया: यदि किसी पड़ोसी की गलती से पूरी बिल्डिंग असुरक्षित घोषित हो जाए, तो निर्दोष परिवारों के लिए मुआवजा पाना कानूनी रूप से बहुत कठिन और लंबा रास्ता है।
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विशेषज्ञ की राय: एडवोकेट अंकित मान के अनुसार, यदि आग लगने वाले फ्लैट मालिक के पास बीमा नहीं है, तो पीड़ित पक्ष को 'लॉ ऑफ टॉर्ट' (Law of Tort) के तहत अदालत में केस लड़ना होगा, जिसमें वर्षों लग सकते हैं।
सिस्टम में बदलाव की मांग
विवेक विहार और इंदिरापुरम जैसी घटनाओं ने अग्नि सुरक्षा तंत्र की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुधारों की आवश्यकता जताई है:
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फायर एनओसी की अवधि: वर्तमान में फायर एनओसी 5 साल के लिए वैध होती है, जिसे कम करने की जरूरत है।
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नियमित जांच: बिल्डिंग के सुरक्षा उपकरणों की हर 6 महीने में अनिवार्य जांच होनी चाहिए।
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संसाधनों की कमी: दिल्ली-एनसीआर की बढ़ती आबादी के मुकाबले दमकल विभाग के पास आधुनिक उपकरणों, स्काई लिफ्टर और मैनपावर की भारी कमी है, जिसे तुरंत दुरुस्त करना अनिवार्य है।

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