सीक्रेट रिपोर्ट से खुला राज, जेल में VIP ट्रीटमेंट पर एक्शन शुरू
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक और बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। भोपाल सेंट्रल जेल में बंद ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट दिए जाने की खबरों के बाद जेल प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। एक सीक्रेट जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए सेंट्रल जेल की डिप्टी जेलर को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
सीक्रेट रिपोर्ट में हुआ था वीआईपी सहूलियतों का खुलासा
सूत्रों के मुताबिक, अदालत द्वारा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद जब पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भोपाल सेंट्रल जेल लाया गया, तभी से उन्हें सामान्य कैदियों से अलग विशेष सुविधाएं दिए जाने के आरोप लग रहे थे। सुरक्षा कारणों और चोटों का हवाला देकर दोनों को जेल के अस्पताल और विशेष वार्ड में रखा गया था। इस मामले की भनक लगते ही खुफिया तौर पर एक सीक्रेट रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें नियमों के खिलाफ जाकर दोनों आरोपियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने की पुष्टि हुई। इस रिपोर्ट के उच्च अधिकारियों तक पहुंचते ही जेल महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में डिप्टी जेलर को हटाने की कार्रवाई की गई।
कैदी नंबर 71 और 1782 बने हैं सास-बेटा
गौरतलब है कि सीबीआई (CBI) की पांच दिनों की रिमांड खत्म होने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को 16 जून तक के लिए जेल भेज दिया था। जेल रिकॉर्ड के अनुसार, पूर्व जज गिरिबाला सिंह को महिला मेडिकल सेक्शन में रखा गया है और उन्हें कैदी नंबर 71 अलॉट हुआ है। वहीं, उनके बेटे समर्थ सिंह को बैरक नंबर-4 में रखा गया है और उनकी पहचान कैदी नंबर 1782 के रूप में दर्ज है। जेल प्रबंधन का दावा है कि अब दोनों के साथ जेल मैनुअल के मुताबिक एक सामान्य कैदी की तरह ही व्यवहार किया जा रहा है और वीआईपी ट्रीटमेंट की शिकायतों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
शुरुआत से ही रसूख के इस्तेमाल के लग रहे हैं आरोप
नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसके बाद उसका शव छत पर फंदे से लटका मिला था। ट्विशा के मायके पक्ष ने शुरू से ही आरोप लगाया था कि पूर्व जिला जज होने के कारण गिरिबाला सिंह और उनका वकील बेटा समर्थ अपने रसूख का इस्तेमाल कर रहे हैं। परिजनों का आरोप था कि घटना की रात ही पुलिस के बड़े अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को फोन घुमाकर सबूतों को नष्ट करने और मामले को दबाने का प्रयास किया गया था। यही वजह रही कि स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच पर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार की सिफारिश पर इस पूरे हाई-प्रोफाइल केस की कमान सीबीआई को सौंपनी पड़ी थी।

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