ऑटोइम्यून बीमारियों का सटीक पता लगाने में मिलेगी मदद
दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरोसाइंसेज सेंटर (एनएससी) में अब तीन नई और महत्वपूर्ण खून की जांच शुरू हो गई हैं। ये जांच न्यूरोफैसिन एंटीबॉडी से जुड़ी हैं, जो नसों की कुछ खास ऑटोइम्यून बीमारियों का सटीक पता लगाने में मदद करती हैं। जांच में ह्यूमन एंटी-न्यूरोफैसिन-140 एंटीबॉडीज, ह्यूमन एंटी-न्यूरोफैसिन-155 एंटीबॉडीज और ह्यूमन एंटी-न्यूरोफैसिन-186 एंटीबॉडीज को शामिल किया गया है। ये जांच उन मरीजों के लिए उपयोगी है, जिन्हें ऑटोइम्यून नोडोपैथी या नोडो-पैरानोडोपैथी जैसी दुर्लभ नसों की बीमारी है। टेस्ट करवाने के लिए सबसे पहले सिर्फ 1 से 3 मिलीलीटर खून का सैंपल पीला ढक्कन वाला प्लेन सीरम वायल में निकालकर जमा करवाएं। ओपीडी मरीज इसे कलेक्शन ग्राउंड फ्लोर के सेंटर रूम नंबर 3 में सुबह 8:30 से दोपहर एक बजे तक जमा करवा सकते है। भर्ती मरीज इसे ग्राउंड फ्लोर के रूम नंबर 64 के कलेक्शन विंडो में सुबह 9:30 से शाम 4:30 बजे तक जमा करवा सकते है।ऐसे में डॉक्टरों के लिए ई-हॉस्पिटल पोर्टल पर और मरीजों के लिए ओआरएस पोर्टल पर रिपोर्ट उपलब्ध होगी। इसके अलावा अभी इसका कोई चार्ज नहीं है। एम्स प्रशासन ने सभी विभागों, वार्ड्स और यूनिट्स को सूचना दी है कि ये टेस्ट अब उपलब्ध हैं। अगर किसी मरीज को लंबे समय से नसों की समस्या है, खासकर ऐसी जिसमें सामान्य इलाज जैसे आईवीआइजी (इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन) से फायदा नहीं हो रहा, तो डॉक्टर इन टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इन टेस्ट से सही बीमारी का पता चलने पर बेहतर इलाज जैसे रिटक्सिमैब दवा से अच्छा सुधार हो सकता है। यह नई सुविधा मेडिकल सुपरिटेंडेंट की मंजूरी से शुरू की गई है।
एम्स में हेपेटाइटिस-ई की जांच फिर शुरू
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हेपेटाइटिस-ई वायरस की ताजा संक्रमण की जांच के लिए एंटी-एचईवी आईजीएम टेस्ट दोबारा शुरू हुआ है। यह टेस्ट अब लैबोरेटरी मेडिसिन विभाग में उपलब्ध है, क्योंकि हाल के समय में इसकी बहुत ज्यादा मांग हो रही है। यह ब्लड टेस्ट हेपेटाइटिस-ई वायरस से होने वाले हालिया (एक्यूट) संक्रमण की पुष्टि करता है। अस्पताल में भर्ती मरीज इसे डॉक्टर ई-हॉस्पिटल पोर्टल पर सीएम2 ऑर्डर एंट्री टेम्पलेट से टेस्ट ऑर्डर कर सकते हैं। वहीं, ओपीडी मरीज न्यू आरएके ओपीडी या पुराने कलेक्शन काउंटर (सीसीएफ) पर ब्लड सैंपल दे सकते हैं। एम्स प्रशासन ने सभी विभागों, सेंटर्स, यूनिट्स और वार्ड्स को सूचित किया है कि यह सुविधा अब पूरी तरह चालू है। एम्स में यह टेस्ट फिर से उपलब्ध होने से डॉक्टरों को सही और जल्दी डायग्नोसिस करने में मदद मिलेगी, जिससे मरीजों का बेहतर इलाज हो सकेगा।

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