जासूसी ऑपरेशन के बीच क्रैश हुआ दुनिया का सबसे बड़ा प्लेन
मैक्सिको की खाड़ी / वॉशिंगटन: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाला और बिना ईंधन की एक बूंद के पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर इतिहास रचने वाला प्रसिद्ध विमान 'सोलर इम्पल्स 2' (Solar Impulse 2) अब इतिहास के पन्नों में ही दफन हो गया है। नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) की हालिया रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि 4 मई को एक मानवरहित परीक्षण उड़ान के दौरान बिजली आपूर्ति ठप होने से यह विमान मैक्सिको की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त होकर नष्ट हो गया। जो विमान कभी 'स्वच्छ ऊर्जा' और 'विश्व शांति' का वैश्विक दूत माना जाता था, उसका अंत समुद्र की गहराइयों में हुआ।
इंजीनियरिंग का चमत्कार और ऐतिहासिक सफर
स्विस इंजीनियरों बर्ट्रेंड पकार्ड और आंद्रे बोर्शबर्ग द्वारा तैयार किए गए इस विमान ने साल 2016 में तब वैश्विक सुर्खियां बटोरी थीं, जब इसने केवल सौर ऊर्जा के दम पर पूरी पृथ्वी की परिक्रमा पूरी की थी। यह विमान तकनीकी रूप से बेहद उन्नत था:
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विशाल विंगस्पैन: इसके पंखों का विस्तार 232 फीट था, जो एक बोइंग 747 विमान से भी अधिक था।
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हल्का वजन: कार्बन फाइबर से बने होने के कारण इसका कुल वजन मात्र 5,100 पाउंड था।
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सौर शक्ति: इसके पंखों पर 17,248 सौर सेल लगे थे, जो इसे 39,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ाने की क्षमता देते थे।
शांति के प्रतीक से सैन्य मशीन तक का सफर
सोलर इम्पल्स 2 का अंत न केवल दुखद रहा, बल्कि काफी विवादास्पद भी रहा। साल 2019 में इस ऐतिहासिक विमान को 'स्काईड्वेलर एयरो' नामक कंपनी को बेच दिया गया था। नई कंपनी ने इसके मूल उद्देश्य (पर्यावरण संरक्षण) को बदलकर इसे एक मिलिट्री सर्विलांस ड्रोन में तब्दील कर दिया। इसमें जासूसी रडार, हाई-टेक ऑप्टिक्स और फोन टैपिंग जैसे उपकरण लगाए गए थे।
इसके मूल निर्माताओं ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मूल समझौते के अनुसार इस विमान को स्विट्जरलैंड के म्यूजियम में संरक्षित किया जाना था, लेकिन इसे सैन्य परीक्षणों के जोखिम भरे क्षेत्र में झोंक दिया गया।
हादसे की रात और तकनीकी विफलता
हादसे के समय यह विमान मिसिसिपी के स्टेनिस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक ऑटोनोमस (कंप्यूटर नियंत्रित) उड़ान पर था। उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी खराबी आई और बिजली की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई, जिससे विमान सीधे समुद्र में जा गिरा। गनीमत यह रही कि विमान मानवरहित था, इसलिए कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
भविष्य की तकनीक पर सवाल
इस दुर्घटना ने सौर ऊर्जा से चलने वाले लंबी दूरी के ड्रोन्स की सुरक्षा और उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर इम्पल्स 2 का नष्ट होना सौर उड्डयन (Solar Aviation) के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति है। यह हादसा दर्शाता है कि अत्यधिक ऊंचाई पर सौर ऊर्जा पर निर्भर प्रणालियों को अभी भी बिजली प्रबंधन और ऑटोनोमस नेविगेशन के मोर्चे पर लंबी दूरी तय करनी है।

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